आज की फुर्तीली और व्यस्त जिंदगी में, हम सभी कभी ना कभी Overthinking का शिकार होते हैं। कभी-कभी लिए गए फैसलों पर अफसोस होता है, तो कभी भविष्य की चिंता सताती है। कई बार ऐसा होता है जब हम किसी छोटी सी घटना के बारे में भी बार-बार सोचते हैं। उदाहरण – मान लीजिए आप किसी Meeting में गए और वहां आपने एक Presentation दिया। बाद में आप उस Presentation के बारे में लगातार सोचते रहते हैं की, “क्या मैंने अपनी बात को ठीक से समझया ?”, “लोगों पर मेरा Impressions कैसा पड़ा होगा ?”, “शायद मुझे और मेहनत करनी चाहिए थी।”
ये विचार अगर एक बार आके खत्म हो जाएं तो ठीक है, लेकिन अगर आप इन्हें बार-बार सोचते हैं, और इस वजह से किसी भी काम पर पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं, तो ये Overthinking है। इस आर्टिकल में हम जानेंगे, Overthinking Kya Hai, इसके कारण, प्रकार, लक्षण, और इससे छुटकारा पाने के तरीके। साथ में यह भी समझेंगे कि यह आपके शारीरिक और मानसिक सेहत पर कैसे असर डाल ता है ?

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Overthinking Kya Hai ? (ओवरथिंकिंग क्या है?)
Overthinking का मतलब है किसी भी विषय पर जरूरत से ज्यादा और बार-बार सोचते रहना। यह अक्सर नकारात्मक और चिंता से भरे सोच का रूप ले लेती है, “जहां हम लगातार इस सोच में रहते हैं कि कुछ गलत न हो जाए”। उदाहरण के तौर पर, मान लें कि आपने किसी दोस्त को मिलने का Plan किया, लेकिन वह आखिरी वक्त पर मना कर देता है। फिर आप सोचने लगते हैं, “क्या उसे मेरा Plan पसंद नहीं आया ?”, “क्या मैं उसे Bore कर रहा हूँ?”, “शायद वो अब मुझसे मिलना ही नहीं चाहता।”
ये विचार अगर एक बार दिमाग में आएं तो कोई बड़ी बात नहीं, लेकिन अगर आप इन्हें घंटों या दिनों तक लगातार सोचते रहते हैं, तो यह Overthinking की निशानी है।
Overthinking Kyu Hoti Hai ?
Overthinking कई कारणों से हो सकती है, और यह हमारे दिमागी, दिल से , और सामाजिक अनुभवों से जुड़ी होती है। नीचे कुछ सामान्य कारण और उनके उदाहरण दिए गए हैं जो यह समझने में मदद करेंगे कि Overthinking क्यों होती है।
1. भविष्य की अनजान बातें

भविष्य की अनजान बातें अक्सर Overthinking का प्रमुख कारण होती है। जब हमें यह नहीं पता होता कि भविष्य में क्या होने वाला है, तो हम बार-बार आने वाले नतीजों के बारे में सोचते हैं।
उदाहरण :
आपका एक Important Interview आने वाला है, और आप लगातार सोचते रहते हैं, “अगर मैं असफल हो गया तो क्या होगा ?” आप बार-बार Interview की संभावनाओं पर विचार करते हैं, यह सोचते हुए कि “क्या मैं इसके लिए तैयार हूं?”, “क्या मुझसे कोई गलती हो जाएगी?” यह Overthinking आपकी दिमागी ऊर्जा को खत्म कर देती है और Interview से पहले ही आपको Tension में डाल देती है। इसलिए, आप Interview की तैयारी में ध्यान नहीं दे पाते |
2. अतीत की गलतियों पर दुख
अतीत की गलतियां भी Overthinking का एक बड़ा कारण बनती हैं। हम बार-बार अपने पुराने निर्णयों और गलतियों पर विचार करते हैं और सोचते हैं कि “अगर मैंने उस समय ऐसा नहीं किया होता, तो आज चीजें बेहतर होतीं।”
उदाहरण :
मान लीजिए कि आप कुछ साल पहले किसी नौकरी का Offer ठुकरा चुके हैं, और अब आपको लगता है कि वह निर्णय गलत था। अब, जब भी आपका Career या नौकरी की बात होती है, आप उस पुराने निर्णय पर पछताते हैं और सोचते हैं, “अगर मैंने वो नौकरी ली होती, तो शायद मेरा Career अब बेहतर होता।”
3. कम आत्मविश्वास
जब हम खुद पर विश्वास नहीं करते, तो हम छोटी-छोटी चीजों पर भी ज्यादा ध्यान देने लगते हैं, और हर चीज पर शक करने लगते हैं। यह संदेह हमें Overthinking की स्थिति में डाल देता है।
उदाहरण :
मान लीजिए, आपको Office में एक Presentation देना है। हालांकि, आपको अपने आप पर भरोसा नहीं है कि आप इसे अच्छी तरह से करेंगे। आप लगातार सोचते रहते हैं, “क्या मैं इस Presentation को सही से कर पाऊंगा ?”, “क्या लोग मेरी बातों को गंभीरता से लेंगे ?”, “अगर मैंने कुछ गलत कहा तो क्या होगा ?” यह आत्म-संदेह आपको अपनी काबिलियत पर विश्वास करने से रोकता है, और आप बार-बार बुरे विचारों में उलझे रहते हैं। इससे आपका आत्मविश्वास गिर जाता है।
4. हर काम में Perfect होने की चाहत (Perfectionism)
जब हम हर काम को बिल्कुल Perfect करना चाहते हैं, तो यह Perfectionism Overthinking का रूप ले सकता है। हम खुद से अत्यधिक उम्मीदें रखते हैं, और छोटी-छोटी गलतियों पर भी ज्यादा सोचने लगते हैं।
उदाहरण :
आप एक Report तैयार कर रहे हैं और बार-बार उसके हर छोटे-छोटे Details को जांचते रहते हैं। हालांकि, Report लगभग पूरी हो चुकी है, लेकिन आप सोचते रहते हैं, “अगर इसमें कोई गलती रह गई तो क्या होगा?” आप इसे बार-बार Edit करते हैं, और इस वजह से आपका काम समय पर पूरा नहीं होता।
5. लोगों की राय का डर (Fear of Judgement)

लोगों की राय और उनका हमारी जिंदगी में दखल भी Overthinking का कारण हो सकता है। हम अक्सर यह सोचते रहते हैं कि लोग हमारे बारे में क्या सोच रहे हैं, और यह विचार हमारे दिमाग में बार-बार घूमते रहते हैं।
उदाहरण :
आपने किसी Party में एक मजेदार बात कह दी, और बाद में आप सोचते रहते हैं, “क्या लोगों को मेरी बात पसंद आई?”, “क्या मैंने कुछ गलत कहा?”। आप लगातार इस विचार में उलझे रहते हैं कि लोग आपके बारे में क्या सोच रहे होंगे, और यह Overthinking आपको मानसिक रूप से परेशान करती है।
Jyada Sochne Se Kya Hota Hai ?
1. मानसिक थकान
Overthinking आपके दिमाग को थका देती है। जब आप एक ही समस्या के बारे में लगातार सोचते रहते हैं, तो इससे दिमागी थकावट होती है। उदाहरण के लिए, अगर आप दिनभर एक ही चिंता में डूबे रहते हैं कि किसी Meeting में क्या बोलना है, तो शाम तक आपका दिमाग पूरी तरह थक जाएगा और आप खुद को मानसिक रूप से कमजोर महसूस करेंगे।
2. निर्णय लेने में कठिनाई

Overthinking के कारण निर्णय लेना मुश्किल हो जाता है। आप छोटी से छोटी चीज के बारे में भी बार-बार सोचते हैं और सही निर्णय नहीं ले पाते। जैसे, अगर आप ने Film देखने का निर्णय लिआ है तो आप सोच सकते हैं कि “क्या मुझे Comedy Film देखनी चाहिए या Action ?” और दोनों Options के बारे में बार-बार सोचते रहने के कारण आखिर में आप किसी भी Film का चयन नहीं कर पाते, जिससे समय की बर्बादी और चिंता बढ़ती है।
3. नींद में कमी
Overthinking की वजह से रात में नींद नहीं आती। उदाहरण के लिए, जब आप सोने से पहले अपने काम या समस्याओं के बारे में सोचते हैं, जैसे कि “कल मैंने वह File ठीक से तैयार की थी या नहीं ?” तो इससे आपकी नींद में Disturb होता है और आप रात भर जाग सकते हैं या हल्की नींद में रहते हैं।
Types of Overthinking (ओवरथिंकिंग के प्रकार)
1. सिर्फ एकदम सही या बिल्कुल नहीं सोचने का तरीका (All-or-Nothing Thinking)
यह सोचने का तरीका ऐसा है जिसमें हर चीज़ को या तो पूरी सफलता या फिर पूरी असफलता के रूप में देखा जाता है, यानी बीच का कोई रास्ता नहीं होता। उदाहरण के लिए, मान लीजिए आपने किसी दोस्त की Party में खाना बनाया, खाना सबको पसंद आया लेकिन एक-दो लोगों ने थोड़ी आलोचना कर दी। अब, आप ये सोचने लगते हैं की, “अगर सभी को पसंद नहीं आया, तो मेरा खाना पूरी तरह Flop हो जायेगा।” इसके बजाय आप यह सोच सकते हैं की “ज्यादातर लोगों ने तारीफ की”
2. बुरा मान लेना (Catastrophizing)
Catastrophizing का मतलब है कि आप किसी भी छोटी सी बात को लेकर तुरंत सबसे बुरी स्थिति की कल्पना कर लेते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आप किसी पार्टी में गलती से कुछ ऐसा कह देते हैं जो कुछ लोगों को पसंद नहीं आता, तो आप सोचने लगते हैं, “अब सब मुझे नापसंद करेंगे” या “मैंने सब बर्बाद कर दिया।”
यह सोचने का तरीका चीजों को जरूरत से ज्यादा बड़ा बना देता है, और आप छोटी-छोटी गलतियों को भी बहुत गंभीर मानने लगते हैं। इससे बेवजह चिंता बढ़ती है और आप खुद को ज्यादा दोषी महसूस करने लगते हैं।
3. सामान्यीकरण (Generalizing)
सामान्यीकरण का मतलब है कि आप एक बुरी घटना के आधार पर पूरी जिंदगी को बुरे तरीके से देखने लगते हैं। जैसे, अगर आपने एक Interview में अच्छा नहीं किया, तो आप सोचने लगते हैं, “अब मैं कभी भी किसी Interview में सफल नहीं हो पाऊंगा।”
इसमें आप एक छोटी सी असफलता को देखकर पूरी भविष्य की उम्मीदें को भी नकारात्मक मान लेते हैं। इससे आपको लगता है कि सब कुछ गलत हो रहा है, जबकि सच में एक गलती का आपकी पूरी जिंदगी पर ऐसा असर नहीं होता।
ओवरथिंकिंग के लक्षण और उपाय

लक्षण
- निर्णय लेने में कठिनाई : छोटे-छोटे फैसले लेने में भी दिक्कत होती है।
- नकारात्मक विचारों का चक्र : आप बार-बार नकारात्मक विचारों में उलझे रहते हैं।
- काम पर ध्यान केंद्रित करने में परेशानी : आप अपनी रोजमर्रा की ज़िम्मेदारियों को ठीक से नहीं निभा पाते।
उपाय
- वर्तमान पल में रहना (Mindfulness) : अपने विचारों को बिना किसी Judgment के स्वीकार करें और वर्तमान पर ध्यान दें। उदाहरण के लिए, जब आपके मन में नकारात्मक विचार आएं, तो उन्हें नोटिस करें लेकिन उन पर ध्यान न दें।
- सोच का Frame बदलें : जब आपको लगे कि आप Overthinking कर रहे हैं, तो अपने विचारों को सकारात्मक दिशा में मोड़ने की कोशिश करें। उदाहरण के लिए, अगर आप सोच रहे हैं कि “मैं इस काम में असफल हो जाऊंगा”, तो उसे बदलकर सोचें “मैंने पहले भी इस तरह के काम किए हैं और मैं इसे भी पूरा कर लूंगा”।
- Exercise करें : Exercise करने से न केवल आपका शरीर स्वस्थ रहता है, बल्कि यह आपके मन को भी शांत करता है।
How to Stop Negative Overthinking (नकारात्मक ओवरथिंकिंग को कैसे रोकें?)
अपने विचारों को चुनौती दें
जब भी दिमाग में नकारात्मक या चिंतित करने वाले विचार आएं, तो सबसे पहले उनसे सवाल पूछें, “क्या यह सच है?” “क्या इसका कोई प्रमाण है?” देखें कि आपके नकारात्मक विचारों का समर्थन करने के लिए कोई ठोस सबूत है या नहीं। अक्सर, हमारे नकारात्मक विचार बिना किसी सबूत के होते हैं।
छोटे कदम उठाएं
अगर आप किसी समस्या को लेकर बहुत सोच रहे हैं, तो इसे छोटे हिस्सों में बाँट ले | सबसे पहले, जानें कि आप किस बारे में चिंतित हैं। उदाहरण : यदि आपको Career को लेकर चिंता है, तो छोटी योजना बनाएं
- नया Skills सीखें : एक छोटा Course या Training लें।
- Networking करें : कामकाजी लोग से संपर्क बढ़ाएं।
- Goals सेट करें : छोटे-छोटे Career लक्ष्य तय करें और उन्हें पूरा करने की योजना बनाएं।
- अफसोस छोड़ें : बीते हुए कल को बदलना मुमकिन नहीं है, इसलिए आगे बढ़ें।
Kya Overthinking Mansik Bimari Hai ?
Overthinking खुद में मानसिक बीमारी नहीं है, लेकिन यह चिंता और अवसाद का कारण बन सकती है। लगातार नकारात्मक विचारों में उलझे रहने से मानसिक स्थिति बिगड़ सकती है। अगर आप महसूस कर रहे हैं कि Overthinking आपकी दिनचर्या को प्रभावित कर रही है, तो एक Expert से सलाह लें।
Overthinking ka Sharir Aur Dimag Par Asar
Overthinking का आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, ओवरथिंकिंग से आपको High Blood Pressure, नींद की समस्या, और सिरदर्द जैसी बीमारी सकता है। साथ ही, इससे आपका मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है, जैसे कि Depression और चिंता के लक्षण।
Overthinking Se Professional Life Par Asar
ओवरथिंकिंग से आपका “काम करने वाला जीबन” भी प्रभावित होता है। उदाहरण के लिए, अगर आप किसी Project पर काम करते समय बार-बार सोचते हैं कि “मैंने यह सही किया या नहीं?”, तो इससे आपकी Productivity कम हो जाती है और आप समय पर काम पूरा नहीं कर पाते।
Raat Mein Overthinking ke Karan Neend Nahin Aati Kya Karein ?
अगर आप रात में ओवरथिंकिंग के कारण सो नहीं पा रहे हैं, तो यहां कुछ उपाय हैं :
- आराम करने के तरीके : सोने से पहले ध्यान (मेडिटेशन) करें या गहरी सांस लेने की तकनीक का इस्तेमाल करें।
- Routine बनाएं : सोने का एक निश्चित समय तय करें और उसे नियमित रूप से Follow करें।
- Positive बातें सोचें : जब भी आप तनाव महसूस करें, अपने दिन के अच्छे समय पर ध्यान दें। जैसे, याद करें कि आपने किसी दोस्त के साथ मजेदार समय बिताया या आपके साथ काम करने वाले किसी व्यक्ति ने आपकी मदद की।
Overthinking आपके जीवन को रोक सकती है, लेकिन सही कदम उठाकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है। ध्यान (Mindfulness), अच्छा सोच और Action Plans से आप ओवरथिंकिंग से छुटकारा पा सकते हैं। अगर स्थिति ज्यादा गंभीर हो रही है, तो Therapist से सलाह लेना सबसे अच्छा विकल्प है।
डिस्क्लेमर
इस ब्लॉग पोस्ट, में हम आपको overthinking के बारे में जानने और इससे निपटने के कुछ शानदार तरीके बताने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह जानकारी सिर्फ एक शुरुआती Guide के रूप में है। अगर आप महसूस करते हैं कि overthinking आपके जीवन को गहराई से प्रभावित कर रही है, तो एक Mental Health Expert से सलाह लेना सबसे अच्छा रहेगा। हमारी सलाह आपको सही दिशा दिखाने का एक प्रयास है, लेकिन आपकी सेहत और खुशी के लिए उत्तम मार्गदर्शन लेना हमेशा सर्वोत्तम है।