Chanakya Niti : इन 6 तरह के लोगों से हमेशा रहें सावधान

एक पूर्ण और खुशहाल जीवन की खोज में, प्राचीन ज्ञान अक्सर अमूल्य मार्गदर्शन प्रदान करता है। महान भारतीय दार्शनिक, अर्थशास्त्री और रणनीतिकार चाणक्य ने अपने किताब “Chanakya Niti” में मानवीय संबंधों की जटिलताओं को कैसे पार किया जाए,  इस विषय पर एक रोड मैप प्रदान किए हैं। Chanakya Niti में चाणक्य के अनुसार, कुछ खास तरह के लोगों से दूर रहना आपकी खुशहाली और खुशी को काफी हद तक बढ़ा सकता है। इस ब्लॉग पोस्ट में, हम उन 6 तरह के लोगों के बारे में जानेंगे जिनसे चाणक्य दूर रहने की सलाह देते हैं, और कैसे उनसे खुद को दूर रखने से आप अधिक शांत और संतुष्ट जीवन जी सकते हैं।

Chanakya Niti : इन 6 तरह के लोगों से हमेशा रहें सावधान

छली मित्रो

Chanakya Niti के अनुसार एक बिष भरे लोटे के ऊपर यदि थोड़ा दूध दाल दिआ जाये तो फिर भी वो बिष का लोटा ही कहलायेगा | इसी प्रकार मुहं के सामने चिकनी चोपड़ी बाते करने वाले और पीठ पीछे काम बिगाड़ ने वाले मित्र (दोस्त) भी उसी बिष के लोटे के समान होते हैं | ऐसे दोस्त को त्याग देना चाहिए |

दुष्ट से बचे

Chanakya Niti में आचार्य चाणक्य लिखते हैं की दुष्ट ब्यक्ति और साँप इन दोनों मे से साँप  अच्छा हे | साँप तो एक ही बार काट ता हे, किन्तु दुष्ट ब्यक्ति पग पग पर काट ता रहता हे | इस लिए दुष्ट ब्यक्ति से बचकर रहना चाहिए |

 क्योंकी साँप तो कभी – कभार  किसी विशेष कारण पर ही मनुष्य को काटता हे | साँप तभी काटता हे जब उस पर पॉव पड़ जाए या वह किसी कारण भयभीत हो जाये, लेकिन दुर्जन ( दुष्ट ) व्यक्ति अकारण ही मनुष्य को दुख पहुंचाने का प्रयाश करता हे |

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मूर्खो का त्याग करे

Chanakya Niti में आचार्य चाणक्य का मानना हे की मुर्ख व्यक्ति मनुष्य होते हुए भी पशु हैं | जैसे पांव में चुभा हुआ कांटा दिखाई तो नहीं पड़ता पर उसका दर्द सहन नहीं किया जा सकता | इसी प्रकार मुर्ख व्यक्ति के शब्द दिखाई नहीं देते , किन्तु ह्रदय में शूल की तरह चुभ जाते हैं | ऐसे मुर्ख को त्याग देना उचित रहता हे|

Chanakya Niti के अनुसार सोच, समझ और ज्ञान की कमी की बजह से मुर्ख व्यक्ति ऐसे निर्णय लेता हे जो बहार की ओर लहरें पैदा करते हैं, न केबल खुद को बल्कि उसके आस-पास के लोगो को भी प्रभाबित करते हैं | मुर्ख लोग न तो चेताबनियों पर ध्यान देते हैं और न ही गलतियों से सीखते हैं ; इसके बजाय, वे उन्हें दोहराते हैं|

हमारे जीबन में सबसे कम आँका जाने वाला खतरा अक्सर चालक , बिरोधी व्यक्ति से नहीं वल्कि मुर्ख व्यक्ति से होता हे | दुश्मन की गणना की गई दुर्भाबना के बिपरीत, एक मुर्ख व्यक्ति द्वारा  उत्पन्न खतरा अप्रत्याशित होता हे और अक्सर मासूमियत या अज्ञानता से छिपा होता हे | क्युकी उनके कार्य , भले ही बुरी मंशा से पैदा न हुए हों , लेकिन Chanakya Niti के अनुसार ऐसे लोग बिनाशकरि परिणामो को जन्म दे सकते हैं |

नकली लोग

नकली लोग

ऐसे लोग आपको किसी भी समय धोखा दे सकते हैं और आपके बारे में गलत सुचना या अफबाह फैला सकते हैं जिससे आपको व्यक्तिगत या भाबनात्मक नुकसान हो सकता है | यह लोग अपना फायदा के लिए आपके भरोसे का फायदा उठा सकते हैं |

जिससे आप गलत फैसला ले सकते हैं | Chanakya Niti के अनुसार ये लोग अक्सर आपकी सफलताओं का जश्न मानाने के बजाय आपसे इर्षा करते हैं | ऐसे लोग आपकी उपलब्धिया को कम आंक सकते हैं | हर पहलु में आप से आगे निकलने की कोशिश करते हैं |

इज़्ज़त न करने वाले लोग

अनादर करने वाले लोग आपकी भाबनाओं को छेड़छाड़ कर सकते हैं जिससे आप खुद को अयोग्य महसूस करेंगे | लगातार अनादर करने से आपकी आत्मविश्वास में धीरे धीरे कमी आ सकते हैं |

ऐसे लोग आपको गलत निर्णय लेने या हानिकारक व्यबहार करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं | यदि आपके मित्र आपका सन्मान नहीं करते हैं तो वह अफबाह फैला कर या गपसप करके अन्य रिश्ते को भी कमज़ोर कर सकते हैं और दूसरों को आपके रहस्य बता सकते हैं | Chanakya Niti में आचार्य चाणक्य के अनुसार ऐसे लोगों को त्याग न ही उचित हे

मतलबी लोग

Chanakya Niti के अनुसार ऐसे लोग आपके रिश्ते को लेनदेन के तौर पर देखते हैं जहां वह आपसे तभी जुड़ते हैं जब उन्हें किसी चीज़ की ज़रूरत होती है | एक स्वस्थ दोस्ती में, देने और पाने का संतुलन होता है | जब दोस्त आपको शिर्फ़ स्वार्थी कारणों से याद करते हैं , तो यह संतुलन खो जाता हैं |आचार्य चाणक्य के अनुसार ऐसे लोगो को अपने आसपास भी नहीं रखना चाहिए |क्योकि समय आने पर ऐसे लोग आपको अपने मतलब के लिए धोखा भी दे सकते हैं और अकेले छोड़ भी सकते हैं | Chanakya Niti में आचार्य चाणक्य के अनुसार ऐसे मतलबी लोगो से खुद को दूर रखना समझदारी हैं |

हमेशा नीचे खींच देने वाले लोग

ऐसे लोग आपको प्रोत्साहित करने के बजाय, वे उदासीनता दिखाते हैं या सक्रिय रूप से आपके प्रयासों को कमज़ोर करते हैं, जिससे आप अपनी क्षमताओं और लक्ष्यों पर सवाल उठाते हैं। एक बार जब आप इन व्यवहारों और उनकी संभावित जड़ों की पहचान कर लेते हैं, तो आप अपनी भलाई की रक्षा के लिए सक्रिय कदम उठा सकते हैं:

यदि संभव हो, तो इन व्यक्तियों के साथ बिताए जाने वाले समय की मात्रा कम करें। आपको संबंधों को पूरी तरह से तोड़ने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन अपनी बातचीत को प्रबंधित करने से आपके मूड और आत्मसम्मान पर उनके प्रभाव को कम किया जा सकता है।

डिस्क्लेमर

Chanakya Niti का ज्ञान जीवन और रिश्तों के जटिल नृत्य में सामाजिक गतिशीलता पर बातचीत करने के लिए चिरकालिक अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। इन 6 व्यक्तित्व प्रकारों के बारे में जागरूक होने और उनसे दूर रहने से, आप अपनी खुद की उन्नति और शांति की रक्षा करने के अलावा स्वस्थ, अधिक फलदायी संबंधों को बढ़ावा दे सकते हैं।समझदारी से काम लें, समझदारी भरे फैसले लें और देखें कि आपका जीवन कैसा चल रहा है।

Frequently Asked Questions

चाणक्य धन के बारे में क्या कहते हैं ?

जिसका ज्ञान पुस्तक तक सिमित है, और जिसका धन दूसरों के कब्जे में है, वह आवश्यक पड़ने पर ना तो ज्ञान का उपयोग कर सकता है और ना ही धन का | जहां मूर्खो का सन्मान नहीं होता और जहां अनाज का भंडारण अच्छा होता है और जहां पति-पत्नी में झगड़ा नहीं होते, वहां धन की देवी लक्ष्मी स्वयं अति हैं |
जो व्यक्ति अपना धन खो देता है उसे उसके मित्र, उसकी पत्नी, उसके नौकर और उसके संबंधी भी त्याग देते हैं। फिर जब वह अपना धन वापस पा लेता है तो त्यागने वाले लोग भी उसके पास लौट आते हैं। इसलिए धन निश्चित रूप से सबसे अच्छा संबंध है।

चाणक्य द्वारा सफल कैसे बनें ?

1. आत्म-अनुशासन विकसित करें: शक्ति के लिए आत्म-नियंत्रण आवश्यक है। चाणक्य ने संयम और लक्ष्य-उन्मुखता पर बहुत ज़ोर दिया। अपनी स्थिति को मज़बूत करने के लिए, एक ठोस दिनचर्या स्थापित करें, समर्पित रहें और बाहरी विकर्षणों का सामना करें।
2. एक मज़बूत नेटवर्क स्थापित करें: कनेक्शन ज़रूरी हैं। चाणक्य ने संबंधों और गठबंधनों के महत्व पर ज़ोर दिया। अपने प्रयासों में आपकी मदद करने के लिए अपने आस-पास एक मज़बूत, विश्वसनीय सहायता प्रणाली बनाएँ।
3. अनुकूलनशीलता को स्वीकार करें: बदलती परिस्थितियों के साथ तालमेल बिठाने में सक्षम होना महत्वपूर्ण है। प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने में चाणक्य की अनुकूलनशीलता और दृढ़ता अक्सर उनकी सफलता के स्रोत थे। ज़रूरत पड़ने पर रास्ता बदलने के लिए तैयार रहें।

चाणक्य व्यापार के बारे में क्या कहते हैं?

1. रणनीतिक योजना: चाणक्य ने सावधानीपूर्वक तैयारी को बढ़ावा दिया। व्यवसाय में आगे रहने के लिए, इसमें विशिष्ट लक्ष्य निर्धारित करना और बाधाओं को पहले से ही पहचान लेना शामिल है।

2. मूल्यवान गठबंधन बनाएँ: मजबूत संबंध विकसित करें। चाणक्य इस विचार में दृढ़ विश्वास रखते थे कि अवसर और सहायता प्राप्त करने के लिए अपने नेटवर्क का उपयोग करके व्यवसाय सफल हो सकते हैं।

3. अनुकूलनशीलता: अनुकूलनीय बनें और बदलाव का स्वागत करें। चाणक्य की शिक्षाओं में बाजार में बदलाव के प्रति प्रतिक्रिया में रणनीति को संशोधित करने के महत्व पर जोर दिया गया है।

4. ईमानदारी: नैतिक सिद्धांतों को ध्यान में रखें। चाणक्य के अनुसार ईमानदारी और न्याय, विश्वास और दीर्घकालिक समृद्धि की आधारशिला हैं।

Author

  • Rohit

    मेरा नाम ROHIT है, मैंने B-TECH CIVIL ENGINEERING की पढ़ाई की है | में Success Strategies, Achieve Goals, Personal Growth, Self Improvement इन सब Topics पर Article लिखता हूँ | मुझे इन्ही सब Topics पैर Blog लिखने का 1 साल का अनुभब है |

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